उत्तराखंड की शायरा बानो का कमाल : बानो के संघर्ष की बदौलत हुआ तीन तलाक का खात्मा

उत्तराखंड की शायरा बानो का कमाल तीन तलाक का खात्मा – An Uttarakhandi Women Fights Against Teen TalaQ

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन तलाक पर छह महीने की रोग लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संवैधानिक पीठ ने इस फैसले को असंवैधानिक ठहराते हुए केंद्र सरकार से छह महीने के भीतर इस मुद्दे पर नया कानून बनाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट से आया यह फैसला भारतीय न्याय इतिहास में मील का पत्थर बन गया है। इस फैसले ने जहां देशभर की लाखों मुस्लिम महिलाओं को बहुत बड़ा अधिकार दे दिया है वहीं तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं के लिए भी न्याय मिलने का रास्ता तैयार हो गया है। इस फैसले के आधार पर अब वे तमाम महिलाएं अपने साथ हुए अन्याय की भरपाई की मांग कर सकती हैं, जिनका जीवन एकतरफा तलाक ने नर्क बना दिया था।

इस पूरे मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण बात यह है कि देशभर की मुस्लिम महिलाओं के अधिकार की रक्षा करने वाले इस फैसले का उत्तराखंड से सीधा संबंध है। दरअसल जिन शायरा बानो नाम की महिला की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर रोक लगाई है, वे उत्तराखंड की निवासी हैं।

An Uttarakhandi Women Fights Against Teen TalaQ

An Uttarakhandi Women Fights Against Teen TalaQ

इस एकतरफा तलाक के खिलाफ शायरा सुप्रीम कोर्ट पहुंची और इस फैसले को चुनौती देते हुए न्याय की अपील कर दी। अपनी अपील में उन्होंने तीन तलाक को अमानवीय और अन्याय का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह महिलाओं के अधिकारों को खत्म करता है। शायरा बानो ने अदालत के सामने यह दलील भी रखी कि तीन तलाक ना ही इस्लाम का हिस्सा है और ना ही आस्था से जुड़ा है। शायरा ने यह तथ्य भी अदालत के सामने रखा कि दूसरे धर्मों में बहुविवाह की कुप्रथा समाप्त हो चुकी है और ऐसा करना दंडनीय अपराध है। शायरा की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *