जर्मनी में दिखेगा उत्तराखंड के कविंद्र बिष्ट के मुक्के का असर

उत्तराखंड के युवा मुक्केबाज कविंद्र सिंह बिष्ट वर्ल्‍ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने जर्मनी पहुँच गए हैं। कविंद्र आठ सदस्यीय भारतीय टीम में शामिल हैं जो हैमबर्ग (जर्मनी) में 25 अगस्त से तीन सितंबर तक आयोजित हो रही चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।

जर्मनी में दिखेगा उत्तराखंड के कविंद्र बिष्ट के मुक्के का असर

जर्मनी में दिखेगा उत्तराखंड के कविंद्र बिष्ट के मुक्के का असर

मूलरूप से जनपद पिथौरागढ़ के पंडा गांव निवासी कविंद्र ने अप्रैल-मई में उजबेकिस्तान में हुई एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 52 किग्रा वर्ग में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। प्रतियोगिता में उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उनका चयन वर्ल्‍ड चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में हुआ।

फुटबॉल छोड़ पहने बॉक्सिंग ग्लब्स

कविंद्र को शुरुआती दिनों में फुटबॉल खेलना पसंद था। वह गांव के छोटे मैदान में फुटबॉल खेला करते थे। बॉक्सिंग कोच धरम चंद ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और बॉक्सिंग करने के लिए प्रेरित किया। गुरु की प्रेरणा से कविंद्र ने फुटबॉल छोड़ बॉक्सिंग ग्लब्स पहने लिए। इसके बाद उन्होंने 2009 में साई सेंटर काशीपुर में प्रवेश लिया। यहां उन्होंने 2013 तक कोच एचएस संधू से मुक्केबाजी के गुर सीखे।

जर्मनी में दिखेगा उत्तराखंड के कविंद्र बिष्ट के मुक्के का असर

जर्मनी में दिखेगा उत्तराखंड के कविंद्र बिष्ट के मुक्के का असर

इसी दौरान उन्होंने ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही बेस्ट बॉक्सर का खिताब जीता। वह स्टेट चैंपियन भी रहे हैं और कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने पंचों से प्रतिद्वंद्वी को नॉकआउट कर चुके हैं। कविंद्र के पिता पिता सूबेदार धन सिंह (सेवानिवृत्त) मौजूदा समय में आइटीबीपी में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। वर्तमान में कविंद्र सेना में कार्यरत हैं।

उत्तराखंड बॉक्सिंग एसोसिएशन के सचिव डॉ. धर्मेंद्र भट्ट के मुताबिक कविंद्र उभरते हुए मुक्केबाज हैं। भारतीय टीम में शामिल होना गर्व की बात हैं। उम्मीद है कि कविंद्र अपने भार वर्ग में देश के लिए पदक जीतने में कामयाब रहेंगे।

 

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