प्लीज मुख्यमंत्री जी हमारे स्कूल को ठीक कर दो

छात्रा अनुष्का ने सीएम से लगाई गुहार. 14 मई को आई तेज आंधी तूफान में उड़ गई थी विद्यालय की छत. दो माह बाद भी नहीं हुआ राप्रावि डुंग्री का ट्रीटमेंट. शिक्षा महकमें को कहने के बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई .

रुद्रप्रयाग। मुख्यमंत्री जी हमारे स्कूल की बिल्डिंग को ठीक कर दो। हमें पढ़ाई लिखाई में बहुत दिक़्क़तें आ रही हैं। यह गुहार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से प्राथमिक विद्यालय की छात्रा अनुष्का ने लगाई है। दरअसल, आँधी-तूफ़ान से यह विद्यालय क्षतिग्रस्त हो गया था।

सरकार शिक्षा के प्रति कितनी संजीदा है, इसकी एक बानगी राजकीय प्राथमिक विद्यालय ड़ुंग्री में देखी जा सकती है। दो माह पूर्व तेज आंधी तूफान आने के कारण स्कूल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसका ट्रीटमेंट आज तक नहीं हो पाया है। व्यवस्था के तौर पर स्कूली छात्रों को राउप्रावि सुमेरपुर में शिफ्ट तो कर लिया गया है, मगर यहां एक कमरे के भीतर भेड़-बकरियों की तरह रहकर छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। ऐसे में सहज ही समझा जा सकता है कि किस तरह छात्रों का पठन-पाठन चल रहा होगा। विद्यालय की स्थिति को देखकर छात्रों ने सीएम से मदद की गुहार लगाई है।

रुद्रप्रयाग जिले में सरकारी शिक्षा के बुरे हालात हैं। कहीं स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं तो कहीं विद्यालय भवन जर्जर स्थिति में हैं और जो विद्यालय आपदा की भेंट चढ़ चुके हैं। विद्यालयों के ट्रीटमेंट करने में भी विभाग कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। विकासखण्ड अगस्त्यमुनि के अन्तर्गत राजकीय प्राथमिक विद्यालय ड़ुंग्रीवभी सरकारी उदासीनता का दंश झेल रहा है। 14 मई 2017 को आई आपदा में विद्यालय की छत उड़ गई और तब से छात्रों का पठन-पाठन राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सुमेरपुर में चल रहा है। जिस समय यह घटना घटी, उसके कुछ घंटे पहले ही स्कूल की छुट्टी हुई, अन्यथा विद्यालय में बड़ी घटना घट सकती थी और जिसके लिए साफ तौर पर शिक्षा विभाग दोषी माना जाता।

वर्ष 1982 में बने राप्रावि डुंग्री की जर्जर हालत होने के बावजूद भी शिक्षा विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और आपदा से क्षतिग्रस्त होने के बाद भी शिक्षा महकमें से किसी भी अधिकारी ने विद्यालय की स्थिति को देखने की जहमत नहीं उठाई। छात्रों के पठन-पाठन को लेकर ग्रामीणों ने ही राउप्रावि सुमेरपुर में बच्चों को पढ़ाने के लिए कहा, जिसके बाद पठन-पाठन विद्यालय में चल रहा है। लेकिन स्कूली छात्रों को यहां एक कमरे के भीतर पढ़ाया जा रहा है, जिससे काफी दिक्कतें आ रही है। एक से लेकर पांचवी तक की क्लास एक ही कमरे में चलने से छात्र परेशान हैं। ग्रामीण संदीप थपलियाल, कैलाश थपलियाल, कमला देवी ने कहा कि आपदा से राप्रावि डुंगी के भवन की छत उड़ गई। जिसके बाद विभागीय अधिकारियों से विद्यालय के ट्रीटमेंट को लेकर पत्राचार किया गया और कईं बार मौखिख रूप से भी कहा गया, लेकिन दो माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीण नौनिहालों को अब मीलों पैदल चलकर अन्य विद्यालय में जाना पड़ रहा है। प्रशासन भी इस ओर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है।

स्कूल चलते समय घटना होती तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी, लेकिन स्कूल की छुट्टी होने के बाद आपदा आई। जिससे बच्चों के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई। 1982 में बने विद्यालय भवन की स्थिति काफी नाजुक बनी है और 14 मई के बाद से तो स्कूल में रहना मुश्किल हो गया। ऐसे में विद्यालय को शिफ्ट किया गया है।

राउप्रावि में पढ़ाई चल रही है और छोटे से कमरे में एक से पांचवीं तक की क्लास चल रही है। पढ़ाई-लिखाई में बहुत दिक्कतें आ रही हैं। मेरी मुख्यमंत्री से यही गुजारिश है कि जल्दी से जल्दी हमारी स्कूल को ठीक किया जाय, जिससे हम अपने विद्यालय में पढ़ाई कर सकें।

राउप्रावि सुमेरपुर में पठन-पाठन कराने में काफी दिक्कतें आ रही है। इस स्कूल की छत भी टपक रही है। बरसात आने पर काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। एक कमरे के भीतर व्यवस्था न होने पर बरामदे में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। शिक्षा विभाग को कईं बार पत्र लिख चुके हैं, मगर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

गुड्डी भंडारी

प्रधानाध्यापिका

 

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