(हरिद्वार) बड़े अधिकारी ने अजगर को पकड़ा और उसे जंगल में छोड़ दिया

हरिद्वार में चल रहे कांवड मेले में उस वक़्त हडकंप मच गया जब कावंडियों के बीच कहीं से अजगर आ गया। कांवडियों में इस अजगर को लेकर काफी उत्सुकता के साथ—साथ डर भी देखा जा रहा था। लेकिन सवाल यह था कि इस अजगर को कौन वहां से भगाये। वहां मौजूद कावंडिये इस अजगर से आतंकित ही थे कि वहां से गुजर रहे एक बड़े अधिकारी ने इसका जिम्मा खुद उठाते हुए अजगर को पकड़ा और उसे जंगल में छोड़ दिया।

 (Haridwar) big officer caught the dragon and left him in the woods


(Haridwar) big officer caught the dragon and left him in the woods

पहली बार उन्होंने अजगर को पकड़कर केवल इसलिए छोड़ा कि डीएम को उस अजगर की फोटो लेनी थी। फोटो सेशन पूरा हाने के बाद एडीएम डा अभिषेक त्रिपाठी ने उसे दुबारा पकड़ कर जंगल में छोड़ा। एडीएम ने जिस तरह से उस अजगर को काबू में किया, उसे देख न केवल कांवडिए दंग रह गये, बल्कि उनके साथ मौके पर मौजूद जिलाधिकारी ने भी एडीएम के इस साहस की सराहना की।

मामला रविवार की दोपहर का है। जब अलकनंदा होटल के पास खाली पड़े मैदान में अचानक से एक अजगर आ गया। फिर क्या था वहां मौजूद कांवड़ियों में अजगर कौतूहल का विषय बन गया था। जिसके चलते वहां हडकंप मच गया। अजगर को पकडने के लिए वन विभाग को सूचना नहीं पहुंच पायी थी। इस बीच वहां से गुजर रही जिलाधिकारी की गाड़ी कांवडियों के हंगामे को देख रुक गयी।

जिलाधिकारी दीपक रावत एडीएम अभिषेक त्रिपाठी के साथ मेला भवन में मिटिंग के लिए जा रहे। हंगामा होते देख उनकी गाड़ी वहां रुक गयी और इससे पहले पूरा मामला समझने की कोशिश कर पाते इससे पूर्व एडीएम ने आगे बढ़कर उस अजगर को काबू करने का प्रयास शुरु कर दिया। यह देख खुद डीएम भी चकित रह गये।

इससे पूर्व कोई कुछ समझ पाता एडीएम ने महज 15 मिनट के भीतर उस अजगर को एक थैले में डाल दिया। लेकिन उन्हें वह अजगर फिर से छोड़ना पड़ा क्योकि जिलाधिकारी को उसकी फोटो लेनी थी। साहब के आदेश पर एडीएम को उस पकड़े हुए अजगर को छोडना पड़ा। डीएम द्वारा फ़ोटो खींचने के बाद फिर एडीएम में अजगर को पकड़ा और जंगल में छोड़ दिया।

 

एडीएम की इस बहादुरी पर सभी हैरान और खुश थे। खुद जिलाधिकारी ने इस बात को लेकर उनकी तारिफ की। एडीएम डा अभिषेक त्रिपाठी से जब इस बारे में बात की गयी तो उन्होंने बताया कि अगर वहां पर वन विभाग के आने का इंतजार किया जाता तो शायद देर हो जाती म, जिससे वहां मौजूद कांवडिये उस अजगर को मार भी सकते थे। अजगर पकड़ते समय डर के सवाल पर वे बोले कि अगर कोबरा सांप होता तो शायद वे ऐसा नहीं करते, लेकिन अजगर बड़ा ही शांत प्रवृत्ति का होता हैं। इसलिए वे ऐसा करने से नहीं ड़रे। उन्होने बताया कि वे इससे पूर्व में भी इस तरह से सांपो को पकड़ दूर छोड़ चुके हैं।

 

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