मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गुरूवार को सचिवालय में बैठक लेते हुए स्कूलों की स्थितियों में सुधार पर बल देते हुए कहा कि स्कूलों में इनोवेटिव कार्य पर बल दें।

While taking a meeting in the Secretariat on Thursday, Chief Minister Mr. Trivandrum Singh Rawat emphasized on improving the conditions of the schools and stressed on the innovative work in the schools.

Chief Minister Mr. Trivandrum Singh Rawat emphasized on improving the conditions of the schools

Chief Minister Mr. Trivandrum Singh Rawat emphasized on improving the conditions of the schools

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गुरूवार को सचिवालय में बैठक लेते हुए स्कूलों की स्थितियों में सुधार पर बल देते हुए कहा कि स्कूलों में इनोवेटिव कार्य पर बल दें। प्रतिभा खोज का प्रयास करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी एवं सरकारी स्कूल के तुलनात्मक अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि स्कूलों को क्लब किया जा सकें, तो इसके लिए प्रयास किये जाए। करें। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र ने कहा कि छोटीछोटी बात पर हड़ताल करना उचित नही है। विभाग के अधिकारी यूनियन के साथ बातचीत करके समस्या का समाधान कर लें। समय पर प्रमोशन दिया जाए। स्कूली शिक्षा को वैज्ञानिक बनाने के लिए एन.सी.ई.आर.टी. पुस्तकों के चलन के लिए आवश्यक तैयारियां कर लिया जाए। माॅडल स्कूल को विकसित करके इसमें पर्याप्त स्टाॅफ, उपकरण आदि दिये जाए, ताकि माॅडल स्कूल का औचित्य सिद्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का क्षेत्र रोजगार का साधन नही है। हमारा मुख्य उद्देश्य शिक्षा का वातावरण बनाना है। शिक्षा में गुणवत्ता सुधार पर बल देते हुए कहा कि उप शिक्षा अधिकारी व खण्ड शिक्षा अधिकारी स्कूलो का भ्रमण करें। शिक्षा की गुणवत्ता सुधार एवं माडल स्कूल निर्माण के आसपास के 57 कि.मी. के स्कूलों को क्लब करके, स्टाॅफ, उपकरण आदि दिये जाए। इस संबंध में ब्लाॅक लेवल पर नोडल अधिकारी तैनात करके 35 दिनों में शासन का रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। स्वच्छता कार्यक्रम पर विशेष बल दिया जाए। अक्षय पात्र योजना की देहरादून, हरिद्वार, रूद्रपुर, काशीपुर में तैयारी पूर्ण कर ली जाए। इसके पश्चात् अन्य स्थलों पर इस योजना को लागू करने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में अध्यापकों की तैनाती की जाए। ट्रांसर्फर को दण्ड न समझा जाए। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताओं को देखते हुए मातृभाषा के साथसाथ अंग्रेजी भाषा के ज्ञान के लिए भी प्रयास किये जाए।

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